ज़िंदगी में रिस्ते ज़रूरी हैं और रिस्तो मेँ ज़िंदगी
रिश्ते ज़िन्दगी की सबसे अहम् चीज़ कही जाये तो गलत नही | हम अपनी पूरी ज़िन्दगी इन्ही रिस्तो को निभाने और सोचने में निकल देते हैं| रिश्ते ही हमारी ज़िन्दगी का आधार है हमारी ज़िन्दगी में रिस्तो का बहुत अधिक महत्त्व होता है रिस्तो के बिना ज़िन्दगी मुस्किल ही नही नामुमकिन सी हो जाती हैं रिश्ते और ज़िन्दगी के बीच बहुत गहरा सम्बन्ध होता है हम अपनी ज़िन्दगी में कई रिश्ते होते हैं जो बनाना चाहते हैं लेकिन बना नहीं पते हैं और कई रिश्ते होते हैं जिन्हें हम तोडना चाहते है लेकिन तोड़ नही पते हैं और साडी ज़िन्दगी यही सोचता रहते हैं की ऐसा क्यूँ होता हैं हमारे साथ? सायद इस सवाल का ज़वाब यही है की कुछ रिश्ते हम खुद चुनते हैं कई रिश्ते तो ऐसे होते हैं जो हमारी दुनिया मैं जन्म लेने से पहले ही जुड़ जाते हैं और कुछ ऐसे होते हैं जो हमारे जन्म लेने के बाद जुड़ते हैं अक्सर हम सोचते हैं की उन रिस्तो को कैसे तोड़े जिन्हें हमने जोड़ा नही ?
रिश्ते आज कल के समय में जबकि दुनिया छोटी होती जा रही हैं और बड़े होते जा रहे हैं ऐसी स्थिति में देखा जाता हैं की लोगो में रिश्ते निभाने की हद काफी कम हो जाते है लोग अक्सर अपनों से ही दुरी बना लेते हैं और रिस्तो में दूरियां आ जाती हैं और कहीं कहीं पर यह भी देखा जाता हैं लोग भले ही एक दुसरे से कितनी भी नफरत करते हो भलाई ही एक दुसरे के लिए बुरा सोचते हो लेकिन उपर से दिखने के लिए वो सब मिलते है और बहर वाले को दिखाते हैं की जब एक दुसरे से खुस हैं|
यहाँ पर थोड़ी देर के लिए यह सोचने वाली बात है की वाकई में क्या सही ह इन दोनों में से सिर्फ क्या दुनिया के दिखने के लिए ही सही जिन रिस्तो की मौत हो चुकी हो उनको अपने कंधो पर उठाना ठीक हैं या फिर सिर्फ इसिलए अपने रिस्तो को मार देना ठीक हैं क्यूंकि आक कल का समय इतना स्वार्थ पुर्ड हो चूका हैं की हम खुद के बारे में सोचने से काफी उबर ही नही पाते है या फिर हम इतने ज्यादा प्रैक्टिकल कहा जाये तो गलत नही होगा की हम हो चुके हैं | की बस मतलब होने पर ही लोगो को याद करते हैं और कोई दूसरा हमारी ज़िन्दगी के बारे में कुछ न बोल सके इसिलए हम भी दुसरो से उनकी ज़िन्दगी के बारे में ज्यादा नही पूछते | अब बात आती है उन रिस्तो की जो हम खुद जोड़ते हैं यह रिश्ते ऐसे होते हैं जो की न हमारे खुद से हमारे होते हैं न की खंडन से न की घर से , न की गावं या शहर से,न ही जाती से होते हैनौर न ही धर्म से,पर फिर भी हम ऐसे लोगो से रिश्ते जोड़ते हैं तो कभी स्वार्थ से तो कभी प्यार से तो कभी दोस्ती से , पर सायद यह रिश्ता उन रिस्तो से बहुत अधिक अच्छे होते हैं क्यूंकि कभी इन रिस्तो में अगेर धोखा भी मिले तो इतनी तकलीफ नही होती जितनी की अपनों से मिलने पर होती हैं और कभी कभी तो ऐसा भी होता है की अपने रिश्ते छोड़ देते हैं लेकिन हमारे बनाये रिश्ते हमारा साथ देते हैं|
इस जगह पर एक बात जननी चाहिए की हर रिश्ते चाहे वो अपनी मर्ज़ी से जोड़ा जाये या फिर ऐसे ही चाहे दोस्ती का या प्यार का उसे विश्वास से निभाना चाहिए , क्युकि कोई भी रिश्ता तब तक जिंदा रहता हैं जब तक उसमे विश्वास होता हैं और अगेर ये विश्वास ही हट जाये तो रिस्तो के मायने ही ख़तम हो जाते हैं | और फिर ये बिना विश्वास के रिश्ते इंसान को तोड़ते चले जाते हैं | अब ये हम पर निर्भर करता हैं की रिस्तो को कैसे निभाना हैं धोके से या विश्वास से |
ज़िन्दगी में जितने भी रिश्ते होते हैं सबका महत्त्व हमे समझना चाहये क्युकी जब ज़िन्गागी समझाने निकलती है तो बहुत तकलीफ देती हैं |
बस इतना याद रखना चाहिए ज़िन्दगी में रिश्ते ज़रूरी होते हैं और उतना ही रिस्तो में ज़िन्दगी भी|
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