जीवन का चक्र
ज़िंदगी में अकसर हम ये सोंचते है की ज़िंदगी को हम अपने हिसाब से चला रहे हैं। ज़िंदगी का मतलब वो लाइफ नहीं हैं जो हम जी रहे हैं बल्की लाइफ का मतलब उन ज़िन्दगियों से भी होता हैं जो की हमसे जुड़ीं हुईं होती हैं। अक्सर ये देखा जाता हैं की हम ज़िंदगी में जो भी पाते या खोते हैं तब हम ये समझ लेते हैं की ये सब बस उसी समय के लिये हैं अब इससे हमारा कभी दोबारा सामना नही होगा जबकि ऐसा तो बिलकुल भी नही होता हैं। दुनिया में हरचीज़ एक सर्कल में चलती रहती हैं जिस तरह दिन भी सर्कल में चलता हैं पहले सुबह आती हैं फिर दोपहर फिर शाम और फिर रात। पर जिस तरह कोई भी चीज़ रुकतीं नही जिस तरह रात हो या सुबह कभीएक वक़्त रुकता नही चलता रहता हैं ठीक उसी तरह हमारी लाइफ भी एक सर्कल में चलती रहती हैं। हमारे किये हुए काम वो चाहे अच्छे हो या बुरे वो वापस घूम कर हम तक पहुच ही जाते हैं। जिस तरह कोई पहिया जहा से सुरु करता हैं वापस वही पहुच जाता हैं ठीक उसी तरह हमारी ज़िंदगी भी एक दिन वापस वही पहुच जाता हैं। इसी बीच हमारे किये हुए कर्म चाहे वो अच्छे हो या बुरे हमारे करम बन कर हमे अच्छे या बुरे फल देते हैं। हमारी ज़िंदगी इस सर्कल में ऐसे ही चलती रहती हैं। अक्सर ये देखा जाता हैं की लोगों की पूरी लाइफ निकल जाती हैं लेकिन वो ये छोटी सी बात समझ ही नही पते हैं शायद ही हम लोग इस सर्कल को समझ पते होंगे। जो लोग भी इस सर्कल को समझ जाते हैं वो खुद को शांत रख पाते हैं और सिर्फ अपने किये हुए काम पर ध्यान देते हैं क्योंकि वो अच्छे से जानते हैं की उनके द्वारा किये गए अच्छे या बुरे कर्म का फल उन्हें मिलेगा ही। तो अगर वाकई ज़िंदगी को समझना हैं तो लाइफ के इस सर्कल को समझना होगा।
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