परिस्थितियां ही हमें मज़बूत बनती हैं

परिस्थितिया ये वो चीज़ हैं जो वाक़ई में इन्सान को खुद से मिलने में मदद करती हैं। परिस्थितिया अच्छी हो या बुरी ये इंसान को खुद की पहचान कराती हैं। अक्सर ये देखा जाता हैं की इन्सान परिस्थितियों के हिसाब से ढल जाता हैं।
जैसे की अक्सर देखा जाता हैं की परिस्थिति अच्छी होने पर इन्सान खुद को बहुत ही मज़बूत समझने लगता हैं और कभी कभी तो उसमे इस बात को लकेर अहम भी आ जाता हैं और वो ये भूल जाता हैं की जिस तरह कभी हमेशा  दिन नही रहता उसी तरह कभी परिस्थितिया भी एक तरह नही रहती हैं।
इन सब से अलग जो लोग खुद के मन पर काबू रखते हैं जो लोग खुद को हर परिस्थितियों में एक तरह रहते हैं ऐसे लोग न तो बहुत ख़ुशी में विचलित नहीं होते हैं और न ही कभी अहम करते हैं। और न ही बहुत गम में दुखी होते हैं।ऐसे लोग हमेशा ही हर तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार रहते हैं और खुद उस तरह की परिस्थितियों में ढलने के बजाय ये उस पर काबू पते हैं और खुद में छुपी हुई कमी को दूर करते हैं।
देखा जाये तो परिस्थिति वाकई में एक तरह का मौका ही होता है। हर इन्सान के पास जो खुद की कमी और खुबियों को पहचान कर उनको दूर करते हैं और निखारते भी हैं।

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